बक्सर में किसान-मजदूर संगठनों की प्रेस वार्ता: पुलिस प्रशासन पर फर्जी एफआईआर और दमनात्मक कार्रवाई के गंभीर आरोप

 बक्सर।

बक्सर के एक निजी हॉल में आज प्रभावित किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा और बिहार संयुक्त किसान मोर्चा की संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर फर्जी एफआईआर दर्ज करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए। कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के बिहार प्रभारी दिनेश कुमार ने प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन दमन के बल पर किसानों और मजदूरों की आवाज को नहीं दबा सकते।


उन्होंने कहा कि बक्सर के किसान शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं और वे किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाले नहीं हैं। किसानों को इस बात का गर्व है कि वे भ्रष्ट और निरंकुश प्रशासन को न्यायालय की चौखट तक लाने में सफल रहे हैं।

प्रेस वार्ता में आरोप लगाया गया कि जब से अदालत ने कुछ पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है, बक्सर मुफस्सिल थाना पुलिस गांवों में भय का माहौल बनाकर एफआईआर दर्ज कराने से लोगों को रोकने में लगी है। आरोप यह भी है कि पुलिस सादे लिबास में गांवों में प्रवेश कर लोगों से जबरन पैसे और मोबाइल छीन रही है। कई बार पुलिस के ये कर्मी जब ग्रामीणों द्वारा चोर समझकर पीटे जाते हैं, तो उल्टे उनके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है।


एक हालिया मामले का जिक्र करते हुए दिनेश कुमार ने बताया कि पुलिस यह दावा कर रही है कि वह किसान नेता अश्विनी कुमार चौबे को कांड संख्या 101/2024 में गिरफ्तार करने गई थी, लेकिन ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने पर उन्हें छुड़ा लिया गया। जबकि अश्विनी चौबे को इस मामले में पटना उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) मिला हुआ है और वह उस दिन गांव में मौजूद भी नहीं थे।

उन्होंने सीडब्लूजेसी (CWCJC) के नए प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी के समय पुलिस को वर्दी में होना, वीडियो रिकॉर्डिंग करना और परिजनों को सूचना देना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि पुलिस की एफआईआर पूरी तरह से काल्पनिक और दुर्भावनापूर्ण है।

एफआईआर में जिन 12 लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, उनमें से तीन थर्मल पावर प्लांट में ड्यूटी पर थे और उनकी उपस्थिति बायोमेट्रिक सिस्टम से दर्ज है। इन पर भी पुलिस द्वारा महंगे मोबाइल देने के लिए दबाव बनाया गया था।

पुलिस पक्ष:
इस संबंध में जब मुफस्सिल थाना अध्यक्ष अरविंद कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, "अगर गिरफ्तारी पर स्टे है तो दिखाएं। पुलिस जब पहुंची थी तो लगभग 40 लोग मौके पर मौजूद थे। एफआईआर पूरी तरह से वैध है और इसमें कोई झूठ नहीं है।"

कुल मिलाकर, यह मामला बक्सर में प्रशासन और किसानों के बीच गहराते टकराव का एक और अध्याय बन गया है, जहां एक ओर किसान शांतिपूर्ण आंदोलन का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून सम्मत बता रहा है। मामला अब अदालत और जनआंदोलन दोनों के समक्ष है।

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