किसान अशोक तिवारी की हत्या में एसजेवीएन के अधिकारियों और पुलिस - प्रशासन की कथित संलिप्तता :संयुक्त किसान मोर्चा
क्सर जिले के बनारपुर किसना अशोक तिवारी की मौत के बाद से पुलिस इसकी जांच में जुटी हुई है।वही दूसरी तरफ संयुक्त किसान मोर्चा बिहार के नेताओ द्वारा पीड़ित परिवार से मिल उनको ढाढस बढ़ाया गया।इसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा बिहार द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा की किसान नेता अशोक तिवारी की नौ अक्टूबर की रात्रि में हुई हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। जिसमें चौसा थर्मल पावर के निर्माणधीन कंपनी एसजेवीएन के अधिकारियों और पुलिस - प्रशासन की कथित संलिप्तता शामिल है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता एवं भारतीय किसान यूनियन के बिहार प्रभारी दिनेश कुमार एवं पूर्व मंत्री अखलाक अहमद एवं अधिवक्ता अरुण कुमार के नेतृत्व में एक टीम बक्सर के चौसा स्थित बनारपुर गांव पहुंच कर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और कहा कि सभी नामजद अभियुक्तों तथा इस हत्या में शामिल साजिशकर्ताओं की गिरफ्तारी होने तक आंदोलन जारी रहेगा । इस मामले को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा का एक प्रतिनिधि मंडल बिहार के मुख्य सचिव और डीजीपी से मिलकर एक ज्ञापन के जरिए यह मांग करेगी कि इस घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए एस आई टी गठित की जाय। क्योंकि स्थानीय पुलिस प्रशासन की भुमिका पहले से ही यहां संदिग्ध है।किसान नेता अशोक तिवारी दिनांक नौ अक्टूबर को प्रसाद वितरण में जुटे थे। लगभग सवा आठ बजे रात्रि में रिंकू राय दो आदमी के साथ पहुंचे और अशोक तिवारी की नहीं इच्छा के बाबजूद उन्हें सिकरौल गांव ले गए। हालांकि उस दिन पूर्व मुखिया संजय राय उर्फ गुड्डू राय लगातार फोन करके सिकरौल आने को दबाव बना रहे थे और अशोक तिवारी जाने से इन्कार करते रहे। वे रात्रि में नौ बजे तक गुड्डू राय के घर पर ही थे। यह उनकी पत्नी द्वारा फोन करने पर बताया गया था। दस बजे के बाद उनका फोन स्वीच आफ हो गया। दूसरे दिन सुबह उनकी लाश जख्मों के अनेक निशानों के साथ बरामद हुआ।पूर्व मुखिया संजय राय उर्फ गुड्डू राय के बारे में जगजाहिर है कि वे पिछले कुछ वर्षों से बक्सर के एस डी एम धीरेंद्र मिश्रा और एसजेवीएन के अधिकारियों के एजेंट के रूप में काम करते थे।अशोक तिवारी भी इनके साथ बिजनेस पार्टनर के रूप में काम करते थे और लेन देन को लेकर उनके बीच विवाद था।

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