सुनैना इलाज के लिए विवेक अस्पताल पहुंची थी, जिंदगी की जगह मिली मौत; पति ने लगाए लापरवाही और मारपीट के आरोप

 मौत के बाद भी जवाबों के लिए भटकते रहे परिजन

बक्सर। शहर के चरित्रवन स्थित एक निजी अस्पताल में सोमवार को 24 वर्षीय सुनैना देवी की इलाज के दौरान मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए। जिस उम्र में एक युवती अपने परिवार के साथ भविष्य के सपने संजोती है, उसी उम्र में उसकी जिंदगी अस्पताल के आईसीयू में खत्म हो गई। मौत के बाद अस्पताल परिसर में जुटे परिजनों का आक्रोश, रोती आंखें और इलाज को लेकर उठते सवाल व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करते रहे।


मृतका राजपुर थाना क्षेत्र के बारूपुर गांव निवासी अजीत कुमार की पत्नी थी। परिजनों के अनुसार सुनैना को करीब तीन दिन पहले इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार दोपहर बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी तो अस्पताल कर्मी उसे आईसीयू में ले गए। पति अजीत कुमार का आरोप है कि आईसीयू में ले जाने के बाद सुनैना को लगातार तीन इंजेक्शन लगाए गए और कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई।

पत्नी की मौत के बाद पति के साथ मारपीट के आरोप ने बढ़ाया आक्रोश

सबसे दर्दनाक स्थिति तब बनी, जब पत्नी की मौत के बाद इलाज और मौत का कारण पूछ रहे परिजनों ने अस्पताल कर्मियों से जवाब मांगा। परिजनों का आरोप है कि इसी दौरान मृतका के पति के साथ मारपीट की गई। इसके बाद अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जुट गई और काफी देर तक हंगामा होता रहा।


सूचना पर पुलिस पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। परिजनों ने पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं, पूरी व्यवस्था का है

इस घटना ने बक्सर की निजी चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने वाला मरीज और उसका परिवार अस्पताल की व्यवस्था पर कितना भरोसा कर सकता है? अगर किसी मरीज की हालत बिगड़ती है तो परिजनों को उसके इलाज, दी गई दवाओं और अचानक हुई मौत की जानकारी पाने का अधिकार है। लेकिन अगर सवाल पूछने पर ही विवाद और मारपीट की स्थिति पैदा हो जाए तो आम आदमी अपनी पीड़ा लेकर कहां जाए?


स्थानीय लोगों ने भी निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और पूर्व में सामने आई शिकायतों की जांच की मांग उठाई है। धनजी सिंह, अखिलेश ठाकुर और प्रवीण तिवारी ने निजी अस्पतालों की व्यवस्था, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता, इलाज के नाम पर कथित वसूली और अस्पतालों के आसपास मरीजों को पहुंचाने वाले कथित दलालों की भूमिका की जांच की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने नहीं आया है।

अब जांच ही बताएगी—गलती कहां हुई?

सुनैना की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट, चिकित्सकीय जांच, इलाज से जुड़े अभिलेख और अस्पताल में किए गए उपचार की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि इलाज में लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

लेकिन उससे भी बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी परिवार को अपने प्रियजन की मौत के बाद भी जवाब के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा?

20 साल की सुनैना अब वापस नहीं आएगी। लेकिन उसकी मौत अगर व्यवस्था की किसी कमी को उजागर करती है, तो कम से कम इतना जरूर होना चाहिए कि जांच निष्पक्ष हो, सच सामने आए और किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।


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