चौसा प्रखंड में घरेलू गैस उपभोक्ताओं की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। गैस सिलेंडर की डिलेवरी को लेकर बार-बार बदलते नियमों ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। पहले जहां 21 दिन में गैस उपलब्ध हो जाती थी, उसे बढ़ाकर 25 दिन किया गया और अब 45 दिन का इंतजार उपभोक्ताओं के लिए मजबूरी बन गया है।
इस बदलते नियम का सबसे ज्यादा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जहां सदस्यों की संख्या अधिक है। ऐसे परिवारों में एक सिलेंडर मुश्किल से 15 से 20 दिनों तक ही चल पाता है। जिसको लेकर उपभोक्ताओं को खाना जुगाड से बनाने का काम किया जा रहा है।
इसी बीच कालाबाजारी का खेल भी खुलेआम जारी है। चौसा प्रखंड के कई दुकानों में घरेलू लाल सिलेंडरों का धड़ल्ले से व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहां आम उपभोक्ता 45 दिनों तक गैस के लिए इंतजार कर रहा है, वहीं दुकानदारों और कुछ विशेष लोगों को बिना किसी रोक-टोक के सिलेंडर उपलब्ध हो जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे मामले में गैस एजेंसी के कर्मचारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और चौसा बीडीओ की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। प्रशासन की चुप्पी और लापरवाही के कारण कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर सरकार आम जनता को राहत देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो लोगों का गुस्सा कभी भी फूट सकता है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और आम उपभोक्ताओं को राहत कब तक मिलती है।


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