चौसा में 50 दिवसीय गुरु–शिष्य सुजनी कला प्रशिक्षण कार्यक्रम
बक्सर : उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के तत्वावधान में सोमवार से 50 दिवसीय गुरु-शिष्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा, उद्देश्य और लाभों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक सुजनी कला को संरक्षित करना, उसे बढ़ावा देना तथा स्थानीय कारीगरों को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
बैठक में बताया गया कि सुजनी कला का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे 50 दिनों तक चलेगा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी आर्टिजन को प्रतिदिन 300 रुपये की दर से मानदेय दिया जाएगा, जिससे कुल 15,000 रुपये की राशि प्रत्येक प्रशिक्षु को प्राप्त होगी। इससे कारीगरों को न केवल आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि वे पारंपरिक हस्तकला में दक्षता भी प्राप्त कर सकेंगे।
प्रशिक्षण सत्र में सुजनी कला के इतिहास, महत्व, डिज़ाइन, रंग संयोजन, सिलाई तकनीक और आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सुजनी कला बिहार की एक विशिष्ट लोककला है, जिसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत आवश्यक हैं।
इस अवसर पर उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान, पटना के प्रतिनिधि प्रशांत तिवारी, उद्योग विभाग के वृज किशोर कुमार, कौशल्या देवी, सोनी देवी सहित प्रशिक्षक एवं यूएमएसएस के पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी आर्टिजन के बीच इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को लेकर उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला।

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