जनसुराज ने बक्सर से तथागत हर्षवर्धन, डुमरांव से युवराज शिवांग विजय और राजपुर से धनंजय पासवान मैदान में
बक्सर। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए जन सुराज पार्टी ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है, जिसमें बक्सर जिले की तीनों विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी गई है।
बक्सर सीट से पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो. के.के. तिवारी के पुत्र तथागत हर्षवर्धन, डुमरांव से राजघराने के युवराज शिवांग विजय सिंह, और राजपुर (सुरक्षित) से धनंजय पासवान को उम्मीदवार बनाया गया है।
बक्सर विधानसभा (सीट संख्या 200) से उम्मीदवार तथागत हर्षवर्धन (50 वर्ष) सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हैं और 11 वर्षों तक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। वे बक्सर की राजनीति में एक जमीनी और सशक्त ब्राह्मण चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। उनके पिता प्रो. के.के. तिवारी केंद्र में वित्त और विदेश मंत्री जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं।
टिकट मिलने के बाद तथागत हर्षवर्धन ने कहा —
“जन सुराज की परिकल्पना बिहार में जनता का सुंदर राज स्थापित करने की है। पार्टी ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, उसे पूरा करने के लिए मैं हर कार्यकर्ता के साथ मिलकर काम करूंगा।”
डुमरांव विधानसभा (सीट संख्या 201) से युवराज शिवांग विजय सिंह (35 वर्ष) को उम्मीदवार बनाया गया है। वे डुमरांव राजघराने के दिवंगत महाराजा कमल सिंह के पोते और चंद्र विजय सिंह के पुत्र हैं। होटल मैनेजमेंट की डिग्रीधारी शिवांग विजय ने वर्ष 2020 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और 9,390 वोट हासिल कर चौथे स्थान पर रहे थे।
शिवांग विजय सिंह की लोकप्रियता और राजपरिवार की साख उन्हें अन्य दलों के लिए एक मजबूत चुनौती बना सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डुमरांव सीट पर इस बार मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।
वहीं राजपुर (सुरक्षित) सीट से धनंजय पासवान (50 वर्ष) को टिकट दिया गया है। वे सरकारी विद्यालय में शिक्षक हैं और पार्टी संगठन के पुराने कार्यकर्ता माने जाते हैं। धनंजय पासवान की पत्नी अनुपा देवी, डुमरांव की ब्लॉक प्रमुख हैं, जिससे उनकी पकड़ ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत है।
जन सुराज पार्टी की इस सूची ने बक्सर जिले की राजनीति में नई हलचल मचा दी है।
एक ओर जहां पार्टी ने युवा चेहरों और प्रतिष्ठित परिवारों पर भरोसा जताया है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक दलों के लिए यह सीधी चुनौती बनकर उभरी है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या जन सुराज की यह “नयी तिकड़ी” बक्सर, डुमरांव और राजपुर की सियासत में कोई बड़ा उलटफेर कर पाती है या नहीं।

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