सनातन जोड़ो यात्रा के पांचवें दिन उमड़ा जनसैलाब, 100 किलोमीटर की यात्रा में मिला जनसहयोग और उत्साहपूर्ण स्वागत
बक्सर, बक्सर की पवित्र भूमि पर विश्वामित्र सेना द्वारा आयोजित “सनातन जोड़ो यात्रा” का पांचवां दिन ऐतिहासिक बन गया। रविवार को निकली यात्रा में जबरदस्त जनसहयोग और भावनात्मक समर्थन देखने को मिला। 100 किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक, लोगों ने खुले दिल से इस आध्यात्मिक-सांस्कृतिक यात्रा का स्वागत किया।
यात्रा की शुरुआत सुबह 10 बजे बक्सर स्थित प्रधान कार्यालय से की गई। पहला पड़ाव था महर्षि च्वयन मुनि आश्रम (महादेवा घाट, चौसा), जहां 11:30 बजे विशेष पूजन और अर्चना की गई। इसके बाद 11:45 बजे डोमाडेरवा से विशाल पदयात्रा प्रारंभ हुई, जो चौसा बाज़ार होते हुए दुर्गा मंदिर तक पहुंची। रास्ते में स्थानीय लोगों द्वारा भव्य स्वागत किया गया। धार्मिक भजनों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना रहा।
दोपहर 2:30 बजे ऐतिहासिक प्राचीन सूर्य मंदिर, देवढ़िया में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच स्वागत समारोह और सनातनी संबोधन आयोजित किया गया। इसके बाद यात्रा देवढ़िया, इटवा, सगरांव पुल, कजरियां पुल होते हुए गैधरा पहुंची, जहां 4:15 बजे एक और प्रमुख संबोधन हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने सनातन संस्कृति की महत्ता, एकता और संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
शाम होते-होते यात्रा देवी डेहरा, नागपुर, देवल मोड़, रामपुर, ईसापुर महावीर स्थान और चौसा गोला होते हुए पुनः प्रधान कार्यालय पर संपन्न हुई। रास्ते में जगह-जगह प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिससे भक्ति और सेवा भाव की झलक देखने को मिली।
इस मौके पर विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार चौबे ने कहा,
“मुख्यमंत्री द्वारा बक्सर को दी गई 600 करोड़ की सौगात हमारी वर्षों की तपस्या और संघर्ष का परिणाम है। यह केवल विकास की बात नहीं है, बल्कि यह सनातनी आस्था की विजय और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।”
उन्होंने कहा कि सनातन जोड़ो यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया है कि बक्सर की जनता अपनी संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों के साथ खड़ी है। यह यात्रा अब एक जनांदोलन का रूप ले चुकी है, जिसका उद्देश्य केवल धर्म का प्रचार नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता को मजबूत करना है।
स्थानीय लोगों ने इस यात्रा को महायात्रा की संज्ञा दी है और इसे सनातन संस्कृति को जोड़ने की एक ऐतिहासिक पहल माना है। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों की बढ़-चढ़कर भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि धर्म और संस्कृति से जुड़ाव केवल परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा है।
यात्रा के आयोजन, संचालन और सुरक्षा व्यवस्था में सैकड़ों स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका रही। चारों ओर भगवा ध्वज, धार्मिक नारे और सांस्कृतिक उत्सव का वातावरण पूरे जिले में देखने को मिला।
सनातन जोड़ो यात्रा का यह सफल आयोजन न केवल बक्सर की धार्मिक पहचान को नई ऊंचाई दे रहा है, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक सशक्त प्रयास बन चुका है।




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