फौजी बेटे ने दी किसान पिता को अंतिम विदाई, आंदोलनकारी राम निवास सिंह की ट्रेन से गिरकर मौत

बक्सर जिले के बनारपुर गांव ने आज एक सच्चे संघर्षशील किसान को खो दिया। 70 वर्षीय राम निवास सिंह, पिता स्व. राम जागी सिंह, रविवार देर रात पटना से किसान आंदोलन से लौटते समय ट्रेन से गिरकर जीवन की अंतिम यात्रा पर चले गए। चौसा से पटना में हुए किसान प्रदर्शन में शामिल होकर लौटते वक्त अपने साथियों से बिछड़ने के बाद वह दूसरी ट्रेन से चौसा पहुंचे। उतरने के दौरान हादसा हुआ और चलती ट्रेन से गिरने पर उनकी मौत हो गई। जीआरपी ने शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया।


गांव में जब शव पहुंचा तो किसानों ने उनकी मौत को शहादत मानते हुए सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। ढोल-नगाड़ों और नारेबाजी के बीच सैकड़ों किसानों ने कंधा देकर अपने साथी को विदा किया। प्रभावित किसान खेतिहर मजदूर संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी मुन्ना तिवारी ने कहा— “राम निवास जी हमारे आंदोलन के सच्चे सिपाही थे। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ दो वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे थे। पुलिस की लाठियां झेलीं, पटना में सीएम का घेराव किया और हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी। आज उनकी शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।”

गांव में गमगीन माहौल के बीच सबसे भावुक दृश्य उस समय देखने को मिला जब शहीद किसान के बेटे और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान रामलखन ने पिता को मुखाग्नि दी। पिता की विदाई पर आंखें नम करते हुए उन्होंने कहा— “मैं देश की सरहद पर दुश्मनों से लड़ता हूं और मेरे पिता गांव में अपनी जमीन और किसानों के हक की लड़ाई लड़ते हुए शहीद हो गए। आज मुझे गर्व है कि मेरे पिता ने किसानों के अधिकारों के लिए अपना जीवन न्योछावर किया।”

बता दें कि चौसा में बन रहे 1320 मेगावॉट थर्मल पावर प्लांट के लिए किसानों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। राम निवास सिंह की भी जमीन इस परियोजना में शामिल है। किसानों का आरोप है कि जमीन का मुआवजा 10 साल पुराने रेट पर दिया जा रहा है, जबकि मौजूदा बाजार दर बेहद ज्यादा है। इसी के खिलाफ 2022 से चौसा और पटना में आंदोलन जारी है।


25 अगस्त को भी चौसा के सैकड़ों किसान पटना में प्रदर्शन के लिए गए थे। उसी दौरान लौटते वक्त यह दर्दनाक हादसा हुआ। किसानों का कहना है कि राम निवास सिंह जैसे आंदोलनकारी की शहादत उनकी लड़ाई को और मजबूती देगी।


गांव में शोक और गर्व का मिला-जुला माहौल है। एक ओर परिवार अपने बुजुर्ग किसान की असमय मौत पर आंसू बहा रहा है, तो दूसरी ओर फौजी बेटे का सीना चौड़ा है कि उसके पिता ने किसानों की लड़ाई में अपनी जान कुर्बान कर दी।




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