राम की पंचकोसी यात्रा विकास को लेकर बक्सर से शुरू होगी विश्वामित्र सेना की “सनातन जोड़ो यात्रा”
राम की पावन पंचकोसी यात्रा को विकसित कराने और समाज को सनातन धर्म की ओर जागरूक करने के उद्देश्य से विश्वामित्र सेना ने 28 अगस्त से तीन दिवसीय “सनातन जोड़ो यात्रा” की घोषणा की है। इस यात्रा का शुभारंभ बक्सर के ऐतिहासिक रामरेखा घाट से सुबह 9 बजे होगा। यात्रा की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और इसे लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय संयोजक श्री राजकुमार चौबे ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ते विघटनकारी प्रवृत्तियों और सनातन धर्म पर हो रहे लगातार प्रहारों के खिलाफ एक सशक्त संदेश है। उन्होंने कहा कि बिहार सहित देशभर में हिंदू बहनों के सामूहिक धर्मांतरण की घटनाएँ किसी भी सनातनी के लिए गहरी चिंता का विषय हैं, लेकिन राजनीतिक दल इन मुद्दों से विमुख होकर केवल जाति, धर्म और वोट की राजनीति में लगे हैं।
राजकुमार चौबे ने अपील करते हुए कहा कि “सनातन जोड़ो यात्रा” पूरे भारतवर्ष के सनातन समाज की आवाज़ है। यह यात्रा उन शक्तियों के खिलाफ एक संकल्प है जो समाज को तोड़ने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा – “मेरी सबसे बड़ी अपील है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी के बहकावे में आकर अब जाति या वोट के आधार पर कोई न बँटें। हमें याद रखना होगा कि हम सनातनी हैं, हम एक हैं और हमारी लड़ाई भी एक है – सनातन की रक्षा की लड़ाई।”
तीन दिवसीय इस यात्रा का उद्देश्य न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है, बल्कि समाज को यह भी याद दिलाना है कि असली मुद्दा सनातन धर्म की रक्षा और उसकी परंपराओं का संरक्षण है। आयोजन समिति के अनुसार यात्रा के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम भी होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को सनातन संस्कृति और परंपराओं के महत्व से अवगत कराया जाएगा।
गौरतलब है कि पंचकोसी यात्रा का बक्सर से गहरा धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि भगवान राम ने वनवास काल में यहाँ आकर प्रवास किया था और यह क्षेत्र सनातन आस्था का केंद्र रहा है। ऐसे में रामरेखा घाट से शुरू हो रही यह “सनातन जोड़ो यात्रा” धार्मिक चेतना और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक मानी जा रही है।
इस यात्रा के जरिए विश्वामित्र सेना का उद्देश्य समाज को जात-पात और राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठाकर सनातन धर्म की मूल भावना से जोड़ना है। संगठन का मानना है कि यदि समाज एकजुट होगा तो सनातन की रक्षा स्वतः सुनिश्चित होगी।



टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें