चौसा नगर पंचायत में बिना नंबर वाले टीपर से कूड़ा उठाव, नगर पंचायत की यह लापरवाही कई सवाल खड़े करती है
बक्सर जिले के चौसा नगर पंचायत में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर लंबे समय से कूड़ा उठाने का कार्य किया जा रहा है। नगर पंचायत द्वारा जिन टीपर वाहनों का उपयोग कचरा उठाने के लिए किया जा रहा है, उनमें रजिस्ट्रेशन नंबर तक प्रदर्शित नहीं है। परिवहन विभाग के नियमों के मुताबिक कोई भी वाहन चाहे सरकारी हो या निजी, बिना पंजीकरण नंबर के सड़क पर चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में नगर पंचायत की यह लापरवाही सवाल खड़े करती है।
सूत्रों के अनुसार, चौसा नगर पंचायत में कुल तीन टीपर लगाए गए हैं। इन तीनों वाहनों पर नंबर प्लेट मौजूद नहीं है। हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत प्रशासन की निगरानी में ये वाहन लगातार शहर की सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जबकि ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जब इस संबंध में चौसा नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी शुभम कुमार से पूछा गया तो उन्होंने पहले इस मामले की जानकारी से इंकार किया। हालांकि बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि मामले को संज्ञान में लिया गया है। उनका कहना था कि सभी वाहन पंजीकृत हैं और नंबर प्लेट पर नंबर अंकित करने के लिए निर्देश दे दिया गया है।
दूसरी ओर, जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) संजय कुमार ने इस पर स्पष्ट कहा कि चाहे सरकारी वाहन हो या निजी, सभी को परिवहन नियमों का पालन करना अनिवार्य है। बिना नंबर के वाहन चलाना सीधा नियम उल्लंघन है। यदि चौसा नगर पंचायत के टीपर बिना नंबर के चल रहे हैं तो यह गंभीर मामला है और कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर पंचायत की इस अनदेखी से जहां नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, वहीं दुर्घटना या अन्य आपराधिक घटनाओं की स्थिति में वाहनों की पहचान करना भी मुश्किल हो सकता है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार विभाग जानबूझकर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं।
नगर पंचायत द्वारा उपयोग किए जा रहे ये टीपर रोजाना चौसा बाजार से लेकर मोहल्लों तक कचरा उठाने का काम करते हैं। लेकिन इनकी स्थिति ऐसी है कि न तो इन पर सही ढंग से नंबर प्लेट लगी है और न ही समय-समय पर फिटनेस जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि चौसा नगर पंचायत को तुरंत सभी वाहनों पर नंबर अंकित कराना चाहिए और परिवहन विभाग को भी इस पर कठोर कदम उठाना चाहिए, ताकि भविष्य में नियमों की अनदेखी न हो।


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