हम हैं ईमानदार नेता” का अनोखा विकास मॉडल!


बक्सर क्षेत्र में एक नेता जी इन दिनों बड़े गर्व से गली-गली घूम रहे हैं। उनका प्रिय वाक्य है – “हम हैं ईमानदार नेता!” इतना बार-बार दोहराते हैं कि अब मोहल्ले के बच्चे भी खेलते-खेलते यही नारा लगाने लगे हैं। लेकिन जरा धरातल पर नज़र डालिए तो हकीकत कुछ और ही बयां करती है।

जनता पूछती है – “साहब! हमारे गली की सड़क  और नाले कब बनेगी?” तो नेता जी मुस्कुराकर कहते हैं – “हम ईमानदार हैं, सब होगा।” नाली टूटे तो जवाब वही, जल जमाव हो तो भी वही रट – “हम हैं ईमानदार नेता।”


मजेदार बात यह है कि इनके कार्यकाल में जितने भी विकास कार्य हुए, उनमें से अधिकांश बिना प्रकालन बोर्ड (प्रोजेक्ट का शिलापट्ट) लगाए ही कराए गए। अब जनता भी सोच में है कि आखिर यह काम किस खाते से हुआ, किस राशि से हुआ और कब हुआ? शायद ईमानदार नेता जी का नया फार्मूला यही है – “बोर्ड नहीं, तो सवाल नहीं।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क हो या नाली, गली हो या पुलिया – पे जल हो या चबूतरा कागज में A ग्रेड का पास होता है लेकिन धरातल पर काम D ग्रेड पर समाप्त होता है।फिर भी नेता जी पूरे आत्मविश्वास से ऐलान करते हैं – “देखिए, हमने कितने काम किए हैं।”

जनता तंज कसती है – “साहब, अगर ये ईमानदारी है तो बेईमानी कैसी होती होगी?” पर नेता जी के चेहरे पर जरा भी शिकन नहीं आती। वे हाथ जोड़कर अगली गली की ओर बढ़ जाते हैं और वही जुमला दोहराते हैं – “हम हैं ईमानदार नेता!”

कहावत है – “सच बोलने वाले को सब याद रखते हैं।” शायद इसी डर से नेता जी हर बार ईमानदार होने की याद खुद ही दिलाते रहते हैं। क्योंकि जनता तो उनके विकास कार्यों की हालत देखकर सब भूल ही जाती है।

अब देखना यह होगा कि अगला चुनाव आते-आते जनता नेता जी के इस “ईमानदारी ब्रांड” को याद रखती है या सड़क-नाली की टूटी हालत ही उनकी असली पहचान बन जाती है।


नोट - यह व्यंग्यात्म रचना है किसी व्यक्ति विशेष से इसका कोई लेना देना नहीं है।

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