बक्सर के अजय आर्या उर्फ बिनय ने जन सूरज का थामा दामन,उपेंद्र कुशवाहा के पार्टी के छोड़ा साथ, कहा मेरा एक ही लक्ष्य बक्सर प्रथम है

 



लम्बे समय से प्रशांत किशोर के जन सुराज अभियान को बक्सर के जन जन तक पहुँचा रहे अजय आर्या उर्फ बिनय, ने बताया कि, जिस समय वह रालोसपा नेता उपेन्द्र कुशवाहा के साथ जुड़े थे, उस समय बेहतर शिक्षा नीति लाने, केंद्रीय विद्यालय के साथ ही साथ सभी सरकारी विद्यालयों को दुरुस्त करने जैसी बक्सर के विकास से जुड़ी कई प्रस्तावों लेकर वह उनसे जुड़े थे।लेकिन मानव संसाधन मंत्री केंद्र में बनने के बाद भी उन्होंने बक्सर के लिए कुछ नही किया।अब आम जन प्रशांत किशोर के जन सुराज को एक बेहतर  विकल्प के रूप में देख रहे है।और जुड़ रहे है।उन्होंने मीडिया के समाने एलान किया की अब उनका उपेंद्र कुशवाहा के साथ कोई भी राजनीतिक संबंध नहीं है।

वही उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि, हम द्वैम दर्जे की राजनीति नही करते है।पहले भी हमारा सियासत का केंद्र बिंदु बक्सर का विकास था।और मरते दम तक इस पवित्र नगरी के  उत्थान के बारे में ही सोचता रहूंगा।आज क्या हालात है इस जिले का ,युवा पीढ़ी नशे के चपेट में है तो शहर को लूट का अड्डा राजनेताओं, अधिकारियो एवं जनप्रतिनिधियो ने बना रखा है।अब यंहा के युवा  जात पात की राजनिति से उपर उठकर जन सुराज अभियान को अपना मुहिम बना लिया है, और इस अभियान को जन जन तक ले जा रहे है।जिसका सुखद परिणाम भी जमीन पर दिखाई दे रहा है।


बता दे की 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही  बिहार के बक्सर में रालोसपा के पूर्व नेता सह वर्तमान में प्रशांत किशोर के सहयोगी, पूर्व आईपीएस आनन्द मिश्रा के चहेते अजय आर्या उर्फ बिनय, ने अब तक 2 हजार से अधिक बक्सर के नौजवानों को जन सुराज से जोड़कर अन्य राजनीति दल के नेताओ पर गहरा प्रभाव छोड़ा है।जिसका परिणाम भी अब दिखने लगा है।सभी जिलों में जन सुराज के बढ़ते प्रभाव ने क्रांति ला दिया है।यही कारण है कि देश के सबसे पुरानी पार्टी के नेता भी अब पार्टी छोड़कर जन सुराज का दामन थामने के लिए बेकरार दिखाई दे रहे है।

कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष तथागत हर्षवर्धन,पार्टी के पूर्व विधायक श्रीकांत पाठक,बजरंगी मिश्रा समेत एक दर्जन से अधिक नेताओ ने अपनी तस्वीर प्रशांत किशोर के साथ जारी की है।जन सुराज अभियान को आगे बढ़ा रहे बिनय उर्फ अजय आर्या ने कहा कि, जन सुराज अब लोगो का अभियान बन गया है, सुदूर ग्रामीण इलाके से लेकर शहर के चौक चौराहों पर केवल जन सुराज अभियान का ही चर्चा करते लोग दिखाई दे रहे है।






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